मध्य प्रदेश

अर्चना तिवारी की प्रेम कहानी के तार शुजालपुर से जुड़े

शाजापुर: इंदौर से कटनी के लिए निकली अर्चना तिवारी अचानक इटारसी के बाद गायब हो गई. पुलिस के लिए अर्चना तिवारी पहेली बन गई. नदी, जंगल, रेलवे ट्रेक सब जगह पुलिस ने अर्चना को खोजने के लिए पसीना बहाया. लेकिन अर्चना तिवारी शाजापुर जिले के शुजालपुर में रुककर वापस नेपाल बॉर्डर पहुंच गई. अर्चना तिवारी की कहानी का केंद्र बिंदु शुजालपुर रहा.गौरतलब है कि 7 अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए निकली अर्चना तिवारी अचानक गायब हो गई. जिस ट्रेन से वो कटनी जा रही थी.

इटारसी के पहले उसका अचानक गायब होना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया. लेकिन इस गुमशुदगी की अजीबो गरीब कहानी में उस समय मोड़ आ गया, जब शुजालपुर निवासी सारांश रखोबचंद से अर्चना तिवारी का लिंक अप मिला. इटारसी से गायब हुई अर्चना तिवारी शुजालपुर पहुंची और शुजालपुर में सारांश के साथ दो दिन तक रूकीं. यहां से हैदराबाद के बाद दिल्ली और दिल्ली से नेपाल बॉर्डर पहुंची. पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर 18 अगस्त को शुजालपुर से सारांश को हिरासत में लिया, तब कहीं जाकर अर्चना तिवारी की गुमशुदगी की कहानी की गुत्थी सुलझ पाई.
जनवरी 2025 में हुई थी मुलाकात
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सारांश रखोबचंद जैन और अर्चना तिवारी की पहली मुलाकात जनवरी 2025 को सफर के दौरान रेल में हुई थी. उसके बाद से दोनों में बातचीत का सिलसिला चलता रहा. अर्चना तिवारी परिजनों के दबाव में शादी के खिलाफ थी. इसलिए उसने शुजालपुर के सारांश के साथ मिलकर खुद की गुमशुदगी का अनूठा प्लान बनाया. शुजालपुर में दो दिन रहने के बाद अर्चना तिवारी को सारांश खुद नेपाल बॉर्डर छोडक़र वापस शुजालपुर आ गया. लेकिन पुलिस ने मोबाईल की लोकेशन के आधार पर जब सारांश को हिरासत में लिया, तो यह आधी अधूरी कहानी पूरी कहानी के रूप में सामने आई.

क्राइम पेट्रोल की कहानी को भी फैल कर दिया अर्चना-सारांश ने

जिस अर्चना तिवारी को लेकर पूरे देश-प्रदेश में सनसनी मची हुई थी, उस अर्चना तिवारी की कहानी क्राइम पेट्रोल से कम नहीं निकली. जिस तरीके से अर्चना तिवारी ने खुद की गुमशुदगी की स्क्रिप्ट तैयार की और उसके दोस्त ने उसकी गुमशुदगी में अपनी भूमिका अदा की, इस तरीके की कहानी या तो थ्रिलर या क्राइम पेट्रोल में ही देखने को मिलती है. अर्चना तिवारी की कहानी ने क्राइम पेट्रोल जैसे थ्रिलर को भी मात दे दी.

पुलिस को परेशान करने के लिए है कोई धारा…?

अर्चना तिवारी गुमशुदगी के मामले में मप्र की पुलिस 7 अगस्त से लेकर 19 अगस्त तक जंगल, नदी, रेलवे ट्रेक, प्रदेश के अन्य जिलों में खाक छानती रही. 100 से ज्यादा पुलिस जवान अलग-अलग लोकेशन पर अर्चना तिवारी को खोजते रहे. यहां तक कि इटारसी और होशंगाबाद के बीच नर्मदा पुल पर भी गोताखोरों ने खोज की. इटारसी के जंगलों में भी पुलिस के जवानों ने पसीना बहाया. लेकिन कहानी इसके उलट निकली. पुलिस जो 15 दिन लगातार पसीना बहाकर परेशान हुई. उसके लिए कानून की किताब में कोई धारा है क्या. क्योंकि इस मामले में अर्चना तिवारी और सारांश के खिलाफ कानूनी तौर पर कोई मामला नहीं बनता है. क्योंकि गुमशुदगी अर्चना तिवारी खुद मिल गई. ना उसके साथ कोई वारदात हुई, ना उसने कोई अपराध घटित किया है. इसलिए पुलिस चाहकर भी इनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं कर सकती है. इसलिए कह सकते हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस मामू बनकर रह गई.

रेल में मुलाकात और रेल से ही खत्म…

जनवरी 2025 में सारांश किसी काम से रेल में सफर कर रहा था. उसके सामने एडवोकेट और जज की तैयारी कर रही अर्चना तिवारी भी बैठी हुई थी. दोनों के बीच कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई. ये चर्चा धीरे-धीरे प्रेम प्रसंग में बदल गई. मामला उजागर होने के बाद एक बार फिर रेल से हुई मुलाकात रेल पर ही जाकर खत्म हो गई. क्योंकि गुमशुदगी का मामला जीआरपीएफ का था और जीआरपीएफ ने पूरे मामले की परत दर परत खोल कर रख दी.

कौन है शुजालपुर का सारांश…?

अर्चना तिवारी गुमशुदगी के मामले में पूरे देश-प्रदेश में शुजालपुर के सारांश का नाम सामने आया है. 12वीं तक की पढ़ाई शुजालपुर के निजी स्कूल रेड रोज में पूरी करने के बाद इंदौर चला गया था. वहां उसने आगे की पढ़ाई कर एग्रीकल्चर ड्रोन बनाने की कंपनी का स्टार्टअप शुरू किया था. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सारांश के माता-पिता का कहना है कि लडक़े ने बताया था कि उसके साथ एक वकील लडक़ी सपना है, जो उससे शादी करना चाहती है. सपना और कोई नहीं अर्चना तिवारी का ही दूसरा नाम है. घर वालों के मना करने के बाद लडक़े ने परिजनों को आश्वस्त किया कि वह शादी नहीं करेगा. अब इसे प्रेम प्रसंग कहें या महिला मित्र के साथ निभाई गई दोस्ती. क्योंकि अर्चना तिवारी ने ही अपनी गुमशुदगी की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की, जिसकी निदेशक खुद अर्चना तिवारी निकली. और सारांश उसका मददगार साबित हुआ.

इनका कहना है…
मेरा लडक़ा इंदौर में काम करता था. लडक़े ने बताया था कि सपना नाम की लडक़ी है, जिससे उसके कागज बनवाना है. वह उससे प्रेम करता था, लेकिन मैंने लडक़े को मना कर दिया था. उसके बाद से लडक़ा मान गया था. ना मैंने लडक़ी को देखा और ना कभी उससे मिला. मेरा लडक़ा निर्दोष है.

रवि रखोबचंद, सारांश के पिता

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