वोटर लिस्ट से नाम कटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम निर्देश दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगति की सूची में डाले गए हैं, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं। कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित अवसर के न हटे।
यह आदेश उस समय आया है जब बिहार में एसआईआर का पहला चरण पूरा हो चुका है और अब यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत नौ राज्यों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
- तार्किक विसंगति सूची में शामिल मतदाताओं के नाम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं।
- ग्राम पंचायत भवनों, तालुका कार्यालयों और शहरी वार्ड कार्यालयों में सूचियां लगाई जाएं।
- प्रभावित मतदाताओं को अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा मौका दिया जाए।
- मतदाता स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आपत्ति दाखिल कर सकेंगे।
- बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को भी अधिकृत प्रतिनिधि बनाया जा सकता है।
- प्रतिनिधि के लिए हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान वाला प्राधिकरण पत्र जरूरी होगा।
- सूचियां लगाने के बाद अतिरिक्त 10 दिन का समय दिया जाए।
- राज्य सरकारें चुनाव आयोग को पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराएं।
- जिला प्रशासन और पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
- हर प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा।
कहां और कैसे मिलेगा सुधार का मौका?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी नाम ग्राम पंचायत भवनों, तालुका कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में लगाए जाएं। प्रभावित लोग स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि यहां तक कि बूथ लेवल एजेंट के जरिए भी दस्तावेज और आपत्तियां जमा कर सकते हैं। प्रतिनिधि के लिए हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगा प्राधिकरण पत्र जरूरी होगा।
