जनता को गुमराह कर रहा केंद्र:जयराम रमेश
नई दिल्ली:पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि सरकार खनन के लिए सिर्फ 0.19% क्षेत्र का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है। उनके अनुसार सरकार ने 34 जिलों के कुल क्षेत्रफल को आधार बनाया है, जबकि गणना केवल अरावली क्षेत्र के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि नई परिभाषा (100 मीटर से ऊंचे पहाड़) से दिल्ली-एनसीआर के कई पहाड़ी इलाके सुरक्षा घेरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे भू-माफिया और रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा।
जयराम रमेश ने कहा कि अरावली को हरा-भरा बनाया जाना चाहिए और उसकी रक्षा की जानी चाहिए, लेकिन वे वहां माइनिंग को बढ़ावा क्यों दे रहे हैं? अरावली के पूरे इकोसिस्टम का संतुलन बदल जाएगा। मुझे एक ऐसे मंत्री से यह उम्मीद नहीं थी जिसने 2010 में पर्यावरण की रक्षा पर एक किताब लिखी थी। उन्होंने कल जिस तरह का स्पष्टीकरण दिया, उससे और सवाल खड़े हो गए हैं। बहुत चालाकी से उन्होंने कहा कि वे अरावली की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है… उन्होंने अरावली पहाड़ियों का 0.19% किस आधार पर तय किया है? अरावली पहाड़ियों का वह 0.19% यानी 68,000 एकड़ ज़मीन… यह आंकड़ों का खेल है। पर्यावरण को आंकड़ों का खेल नहीं बनाना चाहिए… ऐसी क्या मजबूरी थी कि आपको अरावली की यह परिभाषा बदलनी पड़ी?
यह भी कहा, जिन 34 जिलों में से 15 जिलों के आंकड़े सत्यापित किए जा सकते हैं, उनमें अरावली क्षेत्र कुल भूमि का लगभग 33 प्रतिशत है। इस बारे में बिल्कुल भी स्पष्टता नहीं है कि नई परिभाषा के तहत इन अरावली क्षेत्रों में से कितना हिस्सा संरक्षण से बाहर कर दिया जाएगा और खनन व अन्य विकास कार्यों के लिए खोल दिया जाएगा।रमेश का कहना है, यदि मंत्री के सुझाव के अनुसार स्थानीय स्थितियों को आधार बनाया जाता है, तो 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली कई पहाड़ियां भी संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी।
अधिकांश पहाड़ी पट्टियां रियल एस्टेट विकास के लिए खोल दी जाएंगी- कांग्रेस
उन्होंने कहा कि संशोधित परिभाषा के कारण दिल्ली-एनसीआर में अरावली की अधिकांश पहाड़ी पट्टियां रियल एस्टेट विकास के लिए खोल दी जाएंगी, जिससे पर्यावरणीय दबाव और अधिक बढ़ेगा।रमेश ने कहा, मंत्री, जो खनन को अनुमति देने के लिए सरिस्का टाइगर रिज़र्व की सीमाओं को पुनः परिभाषित करने की पहल कर रहे हैं, इस बुनियादी तथ्य की अनदेखी कर रहे हैं कि एक परस्पर जुड़े हुए पारिस्थितिकी तंत्र के विखंडन से उसका पारिस्थितिक दायरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है। अन्य स्थानों पर ऐसा विखंडन पहले ही भारी तबाही मचा रहा है।
