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 काशी को मिली नई पहचान

जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बना, तो कई लोगों को सिर्फ पत्थर और इमारतें दिखीं। लेकिन स्थानीय दुकानदार, नाविक और पुरोहितों के लिए इसका मतलब था- सम्मानजनक रोजगार और स्थिर आमदनी। आज फूल-प्रसाद बेचने वाले से लेकर होटल कर्मचारी तक, हजारों परिवारों की आजीविका सीधे-सीधे इस बदलाव से जुड़ी है।बीते 11 वर्षों में काशी के लिए 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत हुईं। इनमें से करीब 36 हजार करोड़ की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं। सड़कें चौड़ी हुईं। घाट संवरें। कनेक्टिविटी सुधरी और दर्शन की व्यवस्था बदली।

आंकड़े बताते हैं कि काशी ने हाल के वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह सिर्फ पर्यटन का पैसा नहीं है, बल्कि उससे जुड़े रोजगार, सेवाएं और स्थानीय व्यापार की पूरी श्रृंखला है। एक नाविक बताते हैं कि पहले दिन भर की मेहनत के बाद भी आमदनी अनिश्चित रहती थी, आज घाटों की रौनक ने काम को स्थिर बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर काशी को अपनी आत्मा कहते हैं। शायद इसी जुड़ाव का असर है कि यहां विकास का मतलब सिर्फ नई इमारतें नहीं, बल्कि श्रद्धा, सुविधा और सम्मान का संतुलन है।

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