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वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट्स का निरीक्षण किया रोहिणी में

नयी दिल्ली:दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने शनिवार को कहा कि सड़क की धूल एवं अधूरे नागरिक कार्यों से उत्पन्न वायु प्रदूषण कोई अपरिहार्य वास्तविकता नहीं, बल्कि एक रोके जा सकने वाली प्रशासनिक चुनौती है और इसके लिए समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रशासन तथा कठोर जवाबदेही आवश्यक है।श्री गुप्ता ने आज रोहिणी सेक्टर-8 स्थित मधुबन चौक पर वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट्स का निरीक्षण के दौरान कहा कि हालिया आकलनों में रोहिणी के कई क्षेत्रों को धूल-प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, जहाँ सड़कें खुदी हुई, बिना तारकोल की या ढीली मिट्टी से ढकी हुई हैं। इन खुले हिस्सों पर वाहनों की आवाजाही से बार-बार धूल उड़ती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार सड़क की धूल दिल्ली में कणीय प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है, जो पीएम10 का बड़ा हिस्सा और पीएम2.5 का भी महत्वपूर्ण योगदान करती है, विशेषकर शीतकाल में, जब स्थिर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ प्रदूषण को और गंभीर बना देती हैं। उन्होंने बताया कि अधूरे उपयोगिता कार्यों के बाद सड़क बहाली में कमी, यांत्रिक सफाई और धूल-दमन उपायों की कमी, विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव तथा क्षतिग्रस्त सड़कों पर यातायात से धूल का पुनःउत्थान—ये सभी कारक समस्या को और बढ़ाते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने रोहिणी के चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर तत्काल और स्पष्ट सुधारात्मक उपायों के निर्देश दिए। इनमें दैनिक यांत्रिक झाड़ू (मैकेनाइज़्ड स्वीपिंग) और नियमित जल छिड़काव अथवा अनुमोदित धूल-दमन रसायनों के उपयोग के माध्यम से समयबद्ध धूल-नियंत्रण शामिल है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहाँ नियामक प्रतिबंधों के कारण पूर्ण कार्य आरंभ नहीं हो सकता, वहाँ खुले सड़क हिस्सों को अस्थायी रूप से पक्का किया जाए या दबाया जाए ताकि धूल का उत्सर्जन रोका जा सके।

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