मध्य प्रदेश

धान उपार्जन केन्द्र संचालन में डिफाल्टर समूह संचालकों का खेल

सीधी : उपार्जन केन्द्र संचालन में लाखों का खेल कर डिफाल्टर हुये समूह संचालक पुन: दूसरे समूह के नाम से धान उपार्जन केन्द्र लेने के जुगाड़ में जुटे हैं। धान उपार्जन केन्द्र संचालन में डिफाल्टर समूह संचालकों का खेल शुरू हो गया।गौरतलब है कि सीधी जिले में 39 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी की व्यवस्था आरंभ में बनाई गई थी। कुछ स्थानों पर अन्य उपार्जन केन्द्र भी संचालित करने की कार्यवाही चल रही है।

ऐसे में पिछले वर्ष डिफाल्टर हुये समूह संचालक पुन: दूसरे समूह के नाम से धान उपार्जन केन्द्र लेने के जुगाड़ में जुटे हुये हैं। डिफाल्टर समूहों द्वारा पिछले वर्ष जमकर मनमानी की गई थी। उनकी मनमानी के चलते सीधी जिले में 7 डिफाल्टर समूहों के माध्यम से खरीदी गई धान में 8126.56 क्विंटल की कमी पाई गई थी। डिफाल्टर समूहों द्वारा धान खरीदी में पूरी गड़बड़ी कम्प्यूटर आपरेटर के माध्यम से की गई। धान शार्टेज के बाद जब वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर जांच हुई तो घोटाले का भंडाफोड हुआ। संबंधित समूहों से वसूली के आदेश भी हुये। वहीं आपरेटरों को ब्लैक लिस्टेड के आदेश भी हुये थे।

उपार्जन केन्द्र में समूह संचालक के सत्यापन की हो जांच जिले के उपार्जन केन्द्र में समूह संचालक को जिम्मेदारी देने से पूर्व इनके सत्यापन की पूरी जांच होनी चाहिये। यदि समूह संचालक पूर्व के कार्य में डिफाल्टर घोषित हैं तो उनको दूसरे समूह के नाम से जिम्मेदारी नहीं सौंपी जानी चाहिये। डिफाल्टर समूह संचालक फिर से धान उपार्जन की जिम्मेदारी लेने के लिये दूसरे समूह का नाम लेकर फिर से बड़े घोटाले को अंजाम देने की फिराक में पूरी तरह से सक्रिय हैं।

कम्प्यूटर आपरेटर के माध्यम से होता है खेल उपार्जन केन्द्र में खरीदी के दौरान गड़बड़ी का समूचा खेल कम्प्यूटर आपरेटर के माध्यम से खेला जाता है। कम्प्यूटर आपरेटर उपार्जन केन्द्र में खरीदी, भंडारण के संबंध में गलत प्रविष्टी करते हैं। उनके यहां खरीदी गई फसल की मात्रा को बढ़-चढक़र प्रविष्ट किया जाता है। यही जानकारी जिला मुख्यालय के संबंधित कार्यालय को भी प्रेषित की जाती है। इसी के आधार पर जानकारी भोपाल कार्यालय तक पहुंचती है।

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