ग्वालियर में नदी पुनरुद्धार की लड़ाई तेज
ग्वालियर: नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटेकर ग्वालियर पहुंची, उनके द्वारा ग्वालियर की जीवन दायनी नदी रही “स्वर्ण रेखा नदी” का निरीक्षण किया गया। उनके साथ स्वर्णरेखा नदी पुनरुद्धार को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले एडवोकेट विश्वजीत रतोनियां भी साथ रहे।मेधा पाटेकर देश भर की छोटी बड़ी नदियों के पुनरुद्धार और संरक्षण को लेकर लड़ाई लड़ रही है। वह ग्वालियर रेवेन्यू कोर्ट में एक मामले में सुनवाई के लिए पहुंची थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ने पर वह इतिहास के पन्नो में शहर की जीवनदायिनी नदी रही स्वर्ण रेखा नदी का जायजा लेने पहुंची।
स्वर्ण रेखा नदी अब स्वर्णरेखा नाले में तब्दील हो चुकी है। ऐसे में उनके साथ स्वर्ण रेखा नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए लड़ाई लड़ने वाले एड विश्वजीत रतोनिया भी पहुँचे। दोनों की मौजूदगी में लक्ष्मी बाई समाधि के बगल में नदी क्षेत्र को देखा गया। मौके पर एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते भारी मात्रा में मिट्टी और उसमें बहते सीवेज के गंदे पानी को देख उन्होंने दुख जाहिर किया। मेधा पाटेकर ने कहा कि ” किसी भी नदी को तटबंध में बांधना उसके मूल रूप से बड़ी छेड़छाड़ होता है, हैरानी यह है कि ग्वालियर की स्वर्ण रेखा नदी जिसकी धारा कभी कल कल होकर बहती थी। आज नाले के रूप में बदल गई है। इसकी पहचान अब शहर के बड़े नालों में की जाती है।
