मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शामिल होंगे गुरु पूर्णिमा के आयोजन में
भगवान श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा ने यहीं पर ली थी शिक्षा दीक्षा
आयोजन को लेकर आश्रम में तैयारियां प्रारंभ
उज्जैन:64 कलाओं में निपुण भगवान श्री कृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम और सखा सुदामा के साथ 64 दिन तक सांदीपनि आश्रम में रहकर शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की थी. 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है. ऐसे में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी यहां दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचेंगे.नवभारत से चर्चा में पंडित राहुल व्यास ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 10 जुलाई को महर्षि गुरु सांदीपनि आश्रम दर्शन पूजन के लिए आएंगे. वे जब विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने थे, उससे भी पहले यहां लगातार दर्शन के लिए आते हैं. यही नहीं यहां पर विकास कार्यों की सौगात भी कई बार श्री यादव द्वारा दी गई है. अब यहां मंदिर का विस्तृत प्लान भी सिंहस्थ के दृष्टिगत बनाया गया है.
ध्वज बदला जाएगा
10 जुलाई को गुरुपूर्णिमा उत्सव पर सांदीपनि आश्रम में प्रातः वेदपाठी ब्राह्मण महर्षि सांदीपनि, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की प्रतिमाओं का पवित्र जल से अभिषेक करेंगे. इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाए जाएंगे और मंदिर की ध्वजा बदली जाएगी.
विद्या आरंभ संस्कार होगा
गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार होगा. यह 16 संस्कारों में से एक है. पहली बार विद्यालय जाने वाले बच्चों का स्लेट (पाटी) पूजन भी किया जाएगा. माता-पिता अपने बच्चों के साथ इस संस्कार में भाग लेंगे.
कुलगुरु भी पूजन करेंगे
गुरु और शिष्य परंपरा पर आधारित कई कार्यक्रम 10 जुलाई को उज्जैन में होंगे, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी भी विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज की उपस्थिति में पूजन और आरती करेंगे. शहर के गुरुकुल और शैक्षणिक संस्थानों में भी गुरुपाद पूजन होगा. गायत्री शक्तिपीठ पर सुबह सजल श्रद्धा प्रखर प्रज्ञा का पूजन के बाद गायत्री मंत्र दीक्षा और अन्य संस्कार किए जाएंगे.
द्वापर से कलयुग तक परंपरा
भगवान श्री कृष्ण ने जिस प्रकार उज्जैन में आकर शिक्षा दीक्षा प्राप्त की थी ऐसे में सांदीपनि आश्रम का विशेष महत्व है क्योंकि यहां स्वयं भगवान नारायण आये, उज्जैन के महिदपुर में नारायणा धाम है. यहां के जंगलों में भगवान श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा लकड़ियां बीनने गए थे, वह प्रसंग भी उज्जैन से जुड़ा हुआ है. द्वापर युग से कलयुग तक वंश परंपरा के अनुसार यहां गुरु पूजन की परंपरा चली आ रही है. इस अवसर पर आश्रम में फूलों से सजावट होगी.
