श्रद्धालु कर सकते है शिवलिंग का स्पर्श महाकाल मंदिर के प्राचीन धाम में
कालों के काल बाबा श्री महाकाल के दरबार में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन की अभिलाषा लेकर पहुंचते हैं। हर भक्त के मन में एक ही इच्छा होती है। बाबा महाकाल का स्पर्श करें, अपने हाथों से जल और पूजन सामग्री अर्पित करें। लेकिन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित होने के कारण कई भक्तों की यह इच्छा अधूरी रह जाती है.
ऐसे श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है कि महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में ही अति प्राचीन जूना महाकाल मंदिर स्थित है। लोकमान्यता है कि राजा विक्रमादित्य की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें यहीं वृद्ध स्वरूप में दर्शन दिए थे। इसी कारण इसे जूना महाकाल कहा जाता है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल श्रावण ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष श्रद्धालु भगवान शिव का स्पर्श कर सकते हैं। वे स्वयं जल चढ़ा सकते हैं, पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं और पूजा-अर्चना भी कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा है कि जो श्रद्धालु बाबा महाकाल का स्पर्श नहीं कर पाए या पंचामृत अभिषेक नहीं कर सके, वे निराश न हों। महाकाल मंदिर प्रांगण में ही स्थित जूना महाकाल के प्राचीन मंदिर में वे भगवान शिव के वृद्ध स्वरूप के दर्शन, पूजन और पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं। मंदिर में अभिषेक कराने वाले पंडित आकाश रावल बताते हैं कि जूना महाकाल की महिमा अत्यंत निराली है। यहां आकर पूजन-अर्चन करने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
