बंदियों ने बनाई गोबर से गणेश प्रतिमाएं
इंदौर: सेंट्रल जेल में इस बार गणेश उत्सव का रंग कुछ अलग ही होगा. यहां सजधज कर आई मूर्तियां बाजार से नहीं, बल्कि खुद कैदियों के हाथों से बनी हैं. खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं को मिट्टी से नहीं, बल्कि गोबर से तैयार किया गया है, जो पूरी तरह ईको-फ्रेंडली हैं और विसर्जन के बाद पौधों के लिए खाद का काम करेंगी.जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि करीब 20 बंदियों ने मिलकर 300 से अधिक प्रतिमाएं बनाई हैं.
इनकी बिक्री जेल परिसर के बाहर बनाए गए केंद्र पर होगी, ताकि लोग आसानी से इन्हें खरीद सकें. उन्होंने कहा “ये प्रतिमाएं इस तरह बनाई गई हैं कि इन्हें घर के गमले में भी विसर्जित किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. यह पहली बार नहीं है जब कैदियों ने अपनी रचनात्मकता से बाहर दुनिया का ध्यान खींचा हो. कुछ दिन पहले महिला बंदियों ने राखियां बनाकर बेची थीं और अब आने वाले दिनों में दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण भी किया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि जेल महानिदेशक वरुण कपूर का मानना है कि कैदियों को इस तरह का प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ा काम दिया जाना जरूरी है. इससे न केवल वे जेल की सजा के दौरान सकारात्मक गतिविधियों में लगे रहते हैं, बल्कि बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी तैयार होता है. दरअसल, जेल प्रशासन का यह प्रयास केवल उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद कैदियों की जिंदगी को नई दिशा देना और पर्यावरण संरक्षण में भी भागीदारी सुनिश्चित करना है.
